विजन 2047 — अतुल्य भारत चलो सजाएँ स्वप्न नया, भारत हो सबसे महान, ज्ञान-विज्ञान की ज्योति जले, गूँजे विश्व में भारत का गान। न कोई पीछे, न कोई दूर, हर हाथ में हो श्रम का नूर, शिक्षा बने सबकी पहचान, हर चेहरे पर हो मुस्कान। गाँवों से लेकर शहरों तक, विकास की गंगा बहती जाए, कौशल, तकनीक और नवाचार से, भारत नई उड़ान भर पाए। नारी शक्ति का मान बढ़े, युवा शक्ति आसमान छुए, किसान, जवान और कर्मवीर, भारत की हर धड़कन बने। हर भाषा, हर संस्कृति का, सम्मान रहे इस देश में, एकता की अमर ज्योति जले, भारत रहे सदैव विश्वास में। 2047 का भारत ऐसा हो— समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर, शांति, प्रगति और मानवता से, विश्व बने जिसका हमसफ़र। हम मिलकर संकल्प उठाएँ, हर बाधा को दूर भगाएँ, कर्तव्य-पथ पर बढ़ते जाएँ, भारत को अतुल्य बनाएँ। विजन हमारा, लक्ष्य महान, भारत की ऊँची हो शान। 2047 में गूँजे संसार— “अतुल्य भारत, जय हिंद महान!” — प्रो. मोहम्मद ओसामा Faculty of Management and Engineering, Lucknow
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